Monday, August 14, 2017

भारत -एक ख्वाब




बंध आँखों से एक ख्वाब देखा ,ख्वाब में ऐसा भारत देखा !
रस्मों रिवाज़ों और गिद्दों से बेख़ौफ़ ,नील गगन में रंग बिरंगी चिड़यों की उड़ान देखी !
बर्फ से ढकी सफ़ेद चादर में झूमते गाते मुस्कुराते ,दुश्मनो से बेख़ौफ़ अपनों के साथ जश्न मनाते जवान देखें !
हरे भरे रास्तों में करम निश्ट अरमानो से ,प्रगति की ओर बढ़ते हुए नौजवान देखें !
बसंत फूलों की बाहार में मदहोश हवाओं की खुश्बूं में ,मैंने मुस्कुराते हुए कई क़लाम देखें !
ऐसे ख्वाबाओं को आँखों में लिए आज जागा हूँ मैं , धर्म जाती और उंच नीच के भेद भाव से परे आया हूँ मैं !
आओ हम सब मिलके चले एक सफर की ओर ,जिसमें होगी कठिनाई भरे अनेक मोड़ !
ऐसी रखें हम इस नव भारत की नीव ,जो बना दे हम सब को चिरंजीव !
तो आओ हम सच में ऐसा अपना गुलिस्ताँ बनाये ,जहाँ सच में एक नहीं अनेक कलाम मुस्कुराये !
आओ देश की बेटियों को दे हम एक ऐसा  आसमान ,जहां भरके उड़ान वोह पूरा करें अपने हर अरमान !
हमारी सांसदों में न हो घमासान ,और हाथ से हाथ मिलाये चलें हर इंसान !
बंद आँखों के उस ख्वाब को ,मैंने अब सच होते देखा हैं !


Sunday, November 29, 2015

Ek Khwab...



Dear Friends,

First of all really feeling bad for being away for so many years. I didn't stop writing for so many years. But Some how I stopped publishing same. But now will start my passion again and this time more frequent and more deeper. To start with here is one of my creation "Ek Khwab" We all are running a race but at the end we all are mediocre. So what is that state of mind which is not allowing us to achieve happiness in mind is nothing but our inner Instinct. Same is my feeling in this poem. Hope you like it. Here it goes. :)


एक ख़्वाब 

बंद आँखों से एक ख्वाब देखता हूँ,
ख्वाब में तुझे अपना देखता हूँ!
दूर तक अंधकार देखता हूँ,
उसमे से एक रोशनी की किरण देखता हूँ!
दिल में  अरमानों के खजाने देखता हूँ,
पर हर खजाने पे बेबसियों के ताले देखता हूँ!
क्यों हो रही हैं ऐसी ना उमीद ज़िंदगी,
जब हर रोज़ सबको खुश देखता हूँ!
आँखों में हैं लाखों ख्वाब,
पर हर ख्वाब में खुद को अधूरा देखता हूँ!
हारना में चाहता नहीं,
जीत में पाता नहीं,ऐसी बेबसी से क्यों खुद को झुझता देखता हूँ!
क्यों ना छोड कर इन बातों को एक ओर,
जीऊं  बनके पतंग बिना डोर!
उड़ता रहूं उस रोशनी की ओर,
छोड़ हार जीत को एक छोर!
अब से खुद को जीना चाहता हूँ मैं,
हार के गम से, जीत की खुशी नही खोना चाहता हूँ मैं!
ज़िंदगी  एक जंग नहीं, बल्कि एक कविता हैं,
जहाँ हर रोज़ मानो एक पल हो,
हर पल में लाखों मूस्खूरहट हो,
हर मूस्खूरहट का एक लम्हा हो,
उन लम्हो को जीतना चाहता हूँ मैं!
बंद आखों के उस ख्वाब को अब हक़ीक़त करना चाहता हूँ मैं!
इन लम्हों को अब अपना बनाना चाहता हूँ मैं!

Wednesday, February 9, 2011

MANZIL


Dear Friends sorry for such a long delay.. in my next blog.. but that's life you dont know sometimes what you doing in your life & where this is leading you in life...Same is my dilemma now... & on that  here is  my next poem "MANZIL" Well again as I am confused... So same is the confusion in my poem & not able to think right ending for same.. Hope you my friends,teachers my guider can help me for same..
Looking ahead for your responses...
मंजील
एक  मंजील  की  तलाश  में  कुछ  दूर  चला  आया  हूँ  मैं
एक  ख़ुशी  की  तलाश  में  कुछ  आगे  निकल  आया  हूँ  मैं!

धुंधली  सी  एक  तस्वीर  का  क्यों  पीछा कर रहा   हूँ  मैं
ना  जाने  किससे   दूर  भाग  रहा  हूँ  मैं!

यूं  तो  न  जाने  क्यों  कितने  चेरे  हैं  इस  मंजिल  के  
पर  न  जाने  कौन सा  पाना  चाहता  हूँ  मैं!

यह  नहीं  समझ  पा  राहा    की  खुदसे  दूर  या  खुद  के  पास  आरहा  हूँ  मैं,
पर  इतना  तो  ज़रूर  समझ  गया  की  एक  सफ़र  पर  चल  पड़ा  हूँ  मैं!

ना  हैं  मुझे  मंजिल  का  पता  न  मालूम  कोई  राहा,
पर  फिर  भी  चलता  ही   जा  राहा  हूँ  मैं!

क्यों  निकला  हूँ  मैं  ऐसे  बेराहा  सफ़र  पर
क्या  पाने  की  कोशिश  कराहा  हूँ  मैं!

शायद  येही  वोह  सवाल  हैं  जिसकी  तालाश  में  चल  पड़ा हूँ  मैं,
पर  यह  सवाल   ही  मेरी  मंजिल  का  सफ़र!

क्योंकि  जिसकी  मुझे  तलाश  हैं  वोह  शायाद  मेरी  ही  बीह्तर  का  सच  हैं,
जिसे  समझने  कही  निकल  पड़ा  हूँ  मैं!

यह   सच  हैं  मेरी  परीक्षा  जिसका  परिणाम हैं  मेरा  अंत 
पर  शायाद  उसी  अंत  की  तलाश  में  आगे  बड़ा  जा  राहा  हूँ  मैं!



Wednesday, December 8, 2010

CRACKERS IN LIFE..(ALL TIMES NOT GOOD)



Hmm. We again did it.. After so long of peace we again did it.. Yesterday after this long again we had a CRACKER SHOW.. this time at VARANASI...
Results 50 injured 1 killed..
Owner IM: Great to hear the ownership who is coming out so brillantly.. anyways such shows will go on & on we will survive while listening them...
Lesson:- One simple lesson or question is individuality bigger than humanity.. I dont have answer probably if you have..
Well on this instance I am remembering one day which probably many of us have forgotten still it is important as life line of metro of INDIA-MUMBAI came to hold.. As I saw that instance not from very far.. I am expressing my feelings about it.. because that day the thing which won was Humanity. & I am proud to belong to that caste known as HUMANITY.. & that day was TUESDAY 11-07-2006
Hope u guys Like it.

11 JULY

गुलशन  से  हमने यह पैगाम  भेजा  हैं !



मरकर  भी  आप  सबको  सलाम  भेजा  हैं !!

 By
Amit Sharma


था 11 July  का  वोह  आम  दिन !
जब  थक  कर  चलें  थे  हम  अपने  घर  के  पास,
मन्न  में  थी  बस  अपनों  से  मिलने  की  आस !

दिन  भर  के  काम  से  हम  थक  कर  होगए थें  चूर!
पर  अब  नहीं  लग  रही  थी  हमें  हमारी  मंजिल  दूर!!

इस  सफ़र  में  हो  रही  थी  कठिनाई  अनेक
पर  इस  में  भी  होसला  दे रही  थी  हमसफ़र  की  तस्वीर  एक!

जीवन  का  सफ़र  तो  करते  थें  हम  हर  दिन
पर  किसे  पता  था  की  मौत  का  सफ़र  कर  रहे  हैं  उस  दिन!

इस ही   सफ़र  का  पहला  पढाव  था  MAHIM स्टेशन ,
जहाँ  से  हमारी  गाडी  चलने  के  कुछ  देर  बाद ,
ना  जाने  क्यों  हमें  दिवाली  आगई  याद !

अनार  की  रौशनी  से  तो  था  हमें  बहुत  प्यार,
पर  उस  दिन  तो  बोम्ब  का  धमाका  भी  सुन्लिया  पहली  बार!

एक  पल  में  मानो  अँधेरा  चा  गया!
सारा  आकाश  खौफ  की  गूंज  से  ठरा   गया!!

यमदूत  बाहें  फेह्लाके  कर  रहे  थें  हमारा  स्वागत  एक  ओर!
जीवन  के  सफ़र  को  हम  छोड़  चले  थें   एक  छोर !

मन्न  में  थी  बस  उसी  हमसफ़र  की  तस्वीर ,
जिस से जुदा  कररही  थी  हमें  हमारी  तकदीर!

हमारी  आँखों  ने  ले  लिया  फिर  मेघों  का  रूप!
जो  बरसा  रहे  थें  हमारे  आंसू  बनकर  लहू!!

तभी   हमारी  तरफ  आते  हुए  दिखाई  दिए  आप!
जो  चाह  रहें  थें  हमें  खीचना  उस सफ़र  से  अपनी  ओर!!

पर  हमारी  जीवन  धारा  का  था  येही  अंत !
तो  फिर  क्या  कर  पाता  कोई  आदमी  या संत !!

पर  आपकी  कृपा  से  चैन  से  छोड़ा हमने  यह संसार!
और  कुछ  नहीं  तो  नसीब  तो  हो  पाया  अन्तिम  संस्कार!!

जीवन  तो  सार्थक  था  ही  हमारा!
किन्तु  आपने  मौत  को  भी  सार्थक  कर  दिखाया!!

और  कुछ  हुआ  या  नहीं  पर  आपने  
मानवता  की  नई मिसाल  कायम  कर  दिखाई!!

और  अब  हमें  चाहिए  बस  एक वोह  सवेरा!
फिर  ना  उजड  पाए  जब  किसीका  बसेरा!!

गुलशन  से  हमने यह पैगाम  भेजा  हैं ! 
मरकर  भी  आप  सबको  सलाम  भेजा  हैं !!

Tuesday, December 7, 2010

Life as never b4.... SUN


My Dear Friends,
After small introduction I am starting my blog with the biggest inspiration in my life. SUN..
The way it go & come (Our day starts & end) give us a new philosophy that every ending.. is always a new beggining... So doesnt matter if day's end because next big day is waiting for u...
Same I am expressing through my short Hindi Poem..

                                         सूरज
डूबता हुआ सूरज हूँ ढल जाऊँगा!
प्रकश से अन्धियारें की और ले जाऊँगा!!
चाँद की चांदनी दे जाऊँगा!
तारों की रौशनी छोड़ जाऊँगा!!
मिलेगी किसीको असफलता की मायूसी
होगी किसीको नाकामयाबी की निराशा,
पर फिर भी छोड़ दूंगा एक आशा!
क्योंकि अगले दिन   होगा फिर एक सवेरा!
और फिर बसेगा किसीका बसेरा!!
तुम छोड़ के निराशाओं को एक छोर
बडोगे प्रकाश के ओर!
लेकर प्रयतन का सहारा,
बनोगे सबकी आँखों का तारा!!
ऐसे ही  होगी मेरी आवाजाही!
जो छोड़  देगी मेरी छाप भर सारी!!!
डूबता हुआ सूरज हूँ ढल जाऊँगा!
  प्रकाश से अन्धियारें की और ले जाऊँगा!!


By
AMIT SHARMA

INTRODUCTION

DEAR FRIENDS,
 
Well after thinking long I am starting my blog..
This blog is more about expressing my feelings towards  my daily surroundings & activity.
It's not about being good or bad.. it's about fact's & realities....
At the same time I am looking at the philosophical aspect of life.& as well looking at few major dates which has significance in each one of us life...
 
Hope I am able to communicate what I want to & at the same time you all can relate to it.. at some place or other in your life..
 
Rest depends on you responses...
 
Thanx to all my friends who will follow it..
 
Your's Truly
Amit Sharma