Hmm. We again did it.. After so long of peace we again did it.. Yesterday after this long again we had a CRACKER SHOW.. this time at VARANASI...
Results 50 injured 1 killed..
Owner IM: Great to hear the ownership who is coming out so brillantly.. anyways such shows will go on & on we will survive while listening them...
Lesson:- One simple lesson or question is individuality bigger than humanity.. I dont have answer probably if you have..
Well on this instance I am remembering one day which probably many of us have forgotten still it is important as life line of metro of INDIA-MUMBAI came to hold.. As I saw that instance not from very far.. I am expressing my feelings about it.. because that day the thing which won was Humanity. & I am proud to belong to that caste known as HUMANITY.. & that day was
TUESDAY 11-07-2006
Hope u guys Like it.
11 JULY
गुलशन से हमने यह पैगाम भेजा हैं !
मरकर भी आप सबको सलाम भेजा हैं !!
By
Amit Sharma
था 11 July का वोह आम दिन !
जब थक कर चलें थे हम अपने घर के पास,
मन्न में थी बस अपनों से मिलने की आस !
दिन भर के काम से हम थक कर होगए थें चूर!
पर अब नहीं लग रही थी हमें हमारी मंजिल दूर!!
इस सफ़र में हो रही थी कठिनाई अनेक
पर इस में भी होसला दे रही थी हमसफ़र की तस्वीर एक!
जीवन का सफ़र तो करते थें हम हर दिन
पर किसे पता था की मौत का सफ़र कर रहे हैं उस दिन!
इस ही सफ़र का पहला पढाव था MAHIM स्टेशन ,
जहाँ से हमारी गाडी चलने के कुछ देर बाद ,
ना जाने क्यों हमें दिवाली आगई याद !
अनार की रौशनी से तो था हमें बहुत प्यार,
पर उस दिन तो बोम्ब का धमाका भी सुन्लिया पहली बार!
एक पल में मानो अँधेरा चा गया! सारा आकाश खौफ की गूंज से ठरा गया!!
यमदूत बाहें फेह्लाके कर रहे थें हमारा स्वागत एक ओर!
जीवन के सफ़र को हम छोड़ चले थें एक छोर !
मन्न में थी बस उसी हमसफ़र की तस्वीर ,
जिस से जुदा कररही थी हमें हमारी तकदीर!
हमारी आँखों ने ले लिया फिर मेघों का रूप!
जो बरसा रहे थें हमारे आंसू बनकर लहू!!
तभी हमारी तरफ आते हुए दिखाई दिए आप!
जो चाह रहें थें हमें खीचना उस सफ़र से अपनी ओर!!
पर हमारी जीवन धारा का था येही अंत !
तो फिर क्या कर पाता कोई आदमी या संत !!
पर आपकी कृपा से चैन से छोड़ा हमने यह संसार!
और कुछ नहीं तो नसीब तो हो पाया अन्तिम संस्कार!!
जीवन तो सार्थक था ही हमारा!
किन्तु आपने मौत को भी सार्थक कर दिखाया!!
और कुछ हुआ या नहीं पर आपने
मानवता की नई मिसाल कायम कर दिखाई!!
और अब हमें चाहिए बस एक वोह सवेरा!
फिर ना उजड पाए जब किसीका बसेरा!!
गुलशन से हमने यह पैगाम भेजा हैं !
मरकर भी आप सबको सलाम भेजा हैं !!